पत्रकारिता लोक तंत्र का चौथा स्तम्भ है तो हिंदी उसकी आत्मा है

पत्रकारिता लोक तंत्र का चौथा स्तम्भ है तो हिंदी उसकी आत्मा है

छतरपुर। पत्रकारिता लोक तंत्र का चौथा स्तम्भ है तो हिंदी उसकी आत्मा है। हिंदी के बिना भारतीय पत्रकारिता महत्वहीन है। हिंदी भाषा ओर पत्रकारिता के मध्य अटूट सम्बन्ध से इनकार नहीं किया जा सकता है। पत्रकार सुरक्षा एवं कल्याण के क्षेत्र में संघर्षरत अखिल भारतीय संगठन “प्रेस...